काश ऐसा होता

काश ऐसा होता , एक ऐसा एहसास है जो हमारे मन में कई बार दस्तक देता है और क्षण भर में ही हताश होकर समाप्त हो जाता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की यह एहसास ही है जो आम आदमी को ख़ास बनाने की छमता रखता है !
कभी कभी ये अहशास इतने दृण हो जाते हैं कि वे ही हमारे जीवन का मकसद बन जाते हैं फिर चाहे ये मकसद हमारे ज़िन्दगी को बना दे या बिगाड़ दें ! इसलिए इन छोटे- छोटे अहसासों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता !

kash aisa hota

“काश ऐसा होता” हमारे जीवन में एक ऐसा महत्वपूर्ण अहसास है जिसे हम सक्सेस को पाने की पहली सीढ़ी मान सकते हैं !
फर्ज कीजिये किसी सक्सेस्फुल पर्सनालिटी के मन में कभी ऐसा अहसास ही नहीं जागा होता तो क्या वो आज अपने इस मुकाम को हाशिल कर पता ?
अगर हम दुनिया के सभी सक्सेसफुल लोगो को दो भागों में विभाजित करें तो हम यह पाएंगे की पहली केटेगरी में वो लोग शामिल हैं जिन्हे धन और संपत्ति विरासत में मिली है ! इस केटेगरी के लोगों के सक्सेस का रास्ता एकदम साफ़ है ! इन्हे सक्सेस को नयी उचाईओं तक ले जाना आशान होता है !
अगर हम बात करे अपने दूसरे केटेगरी के सक्सेस्फुल लोगों की तो इन्होने अपनी पूरी अचीवमेंट खुद के मेहनत , दृणता , दूरदर्शिता , मैनेजमेंट और सबसे ऊपर रिस्क लेने की छमता के आधार पर हाशिल की है ! आप यह जानकार हैरान और खुश होंगे कि पहली केटेगरी के सक्सेस्फुल लोगो के वंसज ने भी कभी न कभी दूसरी केटेगरी के नियम को फॉलो किया था ! अगर आप सोचे तो अनेकों उदाहरण पाएंगे ! फिर भी आप का काम आसान बनाने के लिए मैं एक – दो उदारहण की सहायता लेता हूँ ! रिलायंस के फाउंडर श्री धीरू भाई अम्बानी , इनफ़ोसिस के फाउंडर श्री नारायण मूर्ती जैसे अनेको ऐसे नाम हैं जो सर्व विदित हैं ! इनकी सक्सेस स्टोरी आप गूगल की सहायता से आसानी से पढ़ सकते हैं ! लेकिन हमारा उत्देश्य इस कोलोम से सक्सेस टिप्स देना नहीं है ! सक्सेस टिप्स के लिए अनेको वेब्सीटेस और अनेको स्पीकर ऑनलाइन अवेलेबल हैं !




इस ब्लॉग को स्टार्ट करने का मेरा मकसद सिर्फ इतना है कि “काश ऐसा होता ” के माधयम से मै अपने मन में उत्पन होने वाले अनेक अहसासों को गहराई एवम सच्चाई से लिपिबद्ध करूँगा ! इस कोलोम में लिखे जाने वाले हर एक अहसास , उसके कारण एवं हाशिल करने के तरीको पर विचार करेंगे !

काश ऐसा होता – 1 :  काश हमारे देश के विश्वविद्यलयों और कोलेजो में  “देश भक्ति” और “देश के विकाश” के भी सब्जेक्ट होते

काश ऐसा होता – 2 : काश जातिगत आरक्छण न होता